Overview
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग की योजना है। इसे लोग आम बोलचाल में "कन्यादान योजना" भी कहते हैं। इसका मक़सद है — ग़रीब परिवारों पर बेटी की शादी का जो आर्थिक बोझ पड़ता है, उसमें थोड़ी मदद करना।
इस योजना के तहत पात्र परिवार की बेटी को शादी पर ₹5,000 की एकमुश्त सहायता दी जाती है, जो सीधे बेटी के बैंक खाते में DBT के ज़रिए भेजी जाती है।
पैसे के अलावा इसका एक और मक़सद है
यह योजना सिर्फ़ मदद देने के लिए नहीं बनी। इसकी दो शर्तें ऐसी हैं जो योजना की असली सोच बताती हैं — शादी का पंजीकरण कराना ज़रूरी है, और यह घोषणा देनी होती है कि शादी में दहेज नहीं लिया गया।
पंजीकरण की शर्त से बाल विवाह पर रोक लगती है, क्योंकि पंजीकरण के लिए बेटी की उम्र 18 और लड़के की 21 वर्ष होना ज़रूरी है। और दहेज न लेने की घोषणा से सरकार दहेज प्रथा के ख़िलाफ़ संदेश देती है।
रक़म को लेकर साफ़ बात
₹5,000 की रक़म आज के ख़र्चों के हिसाब से बड़ी नहीं है — यह शादी का पूरा ख़र्च नहीं उठाती। इसे एक सहायता समझें, न कि पूरा इंतज़ाम। लेकिन बीपीएल परिवार के लिए यह रक़म भी मायने रखती है, और इसे पाने के लिए कोई ख़र्च नहीं करना पड़ता।
आवेदन कहाँ होता है
आवेदन अपने प्रखंड के RTPS काउंटर पर जमा किया जाता है। जाँच प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के स्तर से होती है, और स्वीकृति के बाद रक़म बेटी के खाते में भेज दी जाती है।
Benefits
कितनी मदद मिलती है
- ₹5,000 की एकमुश्त सहायता
- रक़म सीधे कन्या के बैंक खाते में DBT से भेजी जाती है — किसी बिचौलिये के हाथ नहीं जाती
- यह अनुदान है — लौटाना नहीं पड़ता, न इस पर कोई ब्याज है
- आवेदन करने का कोई शुल्क नहीं
पैसे के अलावा क्या फ़ायदा है
- शादी का पंजीकरण हो जाता है, जो आगे चलकर क़ानूनी तौर पर बहुत काम आता है — पासपोर्ट, बीमा, संपत्ति और विरासत के मामलों में
- दहेज रहित विवाह की घोषणा दर्ज होती है
- बेटी के नाम से बैंक खाता खुलता है, जो उसकी अपनी आर्थिक पहचान बनाता है
ईमानदार बात: ₹5,000 शादी का पूरा ख़र्च नहीं उठाते। इसे एक सहायता समझें। लेकिन इसके साथ मिलने वाला विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र जीवन भर काम आता है — और बहुत से परिवार यही सोचकर आवेदन करते हैं।
Eligibility
- कन्या और उसका परिवार बिहार का मूल निवासी हो
- परिवार बीपीएल श्रेणी में हो, या परिवार की वार्षिक आय ₹60,000 से अधिक न हो
- विवाह के समय कन्या की आयु कम से कम 18 वर्ष और वर की आयु कम से कम 21 वर्ष हो
- विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है — बिना पंजीकरण प्रमाण पत्र के आवेदन स्वीकार नहीं होता
- दहेज रहित विवाह की घोषणा (शपथ पत्र) देनी होगी
- विवाह 22 नवंबर 2007 के बाद हुआ हो
- कन्या के नाम से बैंक खाता होना चाहिए, क्योंकि रक़म उसी में जाती है
- पुनर्विवाह की स्थिति में लाभ नहीं मिलता — विधवा पुनर्विवाह इसका अपवाद है
सबसे ज़रूरी बात: इस योजना में सबसे ज़्यादा आवेदन विवाह पंजीकरण न होने की वजह से रुकते हैं। शादी के बाद जितनी जल्दी हो सके पंजीकरण करा लें — यही पूरी प्रक्रिया की नींव है।
How to apply
चरण 1 — विवाह का पंजीकरण कराएँ
सबसे पहले शादी का पंजीकरण कराएँ और प्रमाण पत्र लें। इसके बिना आगे कुछ नहीं होगा। पंजीकरण अपने प्रखंड या नगर निकाय के विवाह पंजीकरण कार्यालय से होता है।
चरण 2 — फ़ॉर्म भरें
- अपने प्रखंड कार्यालय के RTPS काउंटर से आवेदन फ़ॉर्म लें
- फ़ॉर्म में कन्या, वर और परिवार की जानकारी भरें
- दहेज रहित विवाह का शपथ पत्र भरकर लगाएँ
- सभी ज़रूरी दस्तावेज़ की फोटोकॉपी साथ लगाएँ
चरण 3 — जमा करें
- भरा हुआ फ़ॉर्म RTPS काउंटर पर जमा करें
- जमा करने की रसीद ज़रूर लें और संभालकर रखें — बाद में स्थिति पूछने के लिए यही काम आएगी
चरण 4 — जाँच और भुगतान
- प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के स्तर पर आवेदन की जाँच होती है
- दस्तावेज़ और पात्रता सही पाए जाने पर आवेदन स्वीकृत होता है
- स्वीकृति के बाद ₹5,000 कन्या के बैंक खाते में DBT से भेज दिए जाते हैं
ध्यान रखें: आवेदन पूरी तरह मुफ़्त है। अगर कोई कर्मचारी, बिचौलिया या "फ़ॉर्म भरवाने वाला" पैसे माँगे तो न दें — इसकी शिकायत प्रखंड विकास पदाधिकारी या समाज कल्याण विभाग की हेल्पलाइन पर की जा सकती है।
शादी के तुरंत बाद आवेदन कर दें। देर करने पर दस्तावेज़ जुटाना मुश्किल होता है और आवेदन की तय अवधि निकल जाने का ख़तरा भी रहता है।
Documents needed
- कन्या और वर का आधार कार्ड
- विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र (सबसे ज़रूरी दस्तावेज़)
- आय प्रमाण पत्र (वार्षिक आय ₹60,000 से कम दिखता हुआ) या बीपीएल कार्ड
- आवासीय (निवास) प्रमाण पत्र
- कन्या की आयु का प्रमाण — जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं का प्रमाण पत्र
- वर की आयु का प्रमाण
- दहेज रहित विवाह का शपथ पत्र
- कन्या के बैंक पासबुक का पहला पन्ना
- पासपोर्ट साइज़ फोटो (विवाह की फोटो भी माँगी जा सकती है)
- वार्ड सदस्य या सरपंच/मुखिया का प्रमाणन
सलाह: आधार, विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र और बैंक पासबुक — तीनों में कन्या के नाम की स्पेलिंग एक जैसी होनी चाहिए। शादी के बाद नाम या सरनेम बदला हो तो यह और ज़रूरी हो जाता है, क्योंकि यहीं सबसे ज़्यादा आवेदन अटकते हैं।
समाज कल्याण विभाग हेल्पलाइन: 1800 345 6262
ईमेल: ssb.samajkalyan@gmail.com