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ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार — जल-जीवन-हरियाली मिशन

जल-जीवन-हरियाली अभियान बिहार 2026: उद्देश्य, 11 घटक और पूरी जानकारी

राज्य योजना जल बचाएं हरियाली बढ़ाएं और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित बनाएं

विवरण

जल-जीवन-हरियाली अभियान बिहार सरकार द्वारा जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित एक व्यापक मिशन है। बिहार में अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट, अत्यधिक गर्मी, सूखा, बाढ़ और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों को देखते हुए इस अभियान के माध्यम से जल एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया है।

जल-जीवन-हरियाली अभियान का शुभारंभ 2 अक्टूबर 2019 को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर किया गया था। अभियान को बिहार के सभी 38 जिलों में मिशन मोड में लागू किया गया है। इसके अंतर्गत जल निकायों के पुनरुद्धार, सार्वजनिक कुओं के संरक्षण, वर्षाजल संचयन, भूजल पुनर्भरण, वृक्षारोपण, वैकल्पिक कृषि तकनीकों और सौर ऊर्जा के उपयोग जैसी विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है। 

इस अभियान के 11 प्रमुख अवयव निर्धारित किए गए हैं। इनमें सार्वजनिक जल निकायों से अतिक्रमण हटाना, तालाबों, आहर-पइन और अन्य जल संरचनाओं का पुनरुद्धार, सार्वजनिक कुओं का जीर्णोद्धार, सोख्ता एवं पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण, वर्षाजल संचयन, पौधशालाओं का विकास और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण शामिल हैं। इसके साथ-साथ ड्रिप सिंचाई, जैविक खेती, वैकल्पिक कृषि तकनीकों और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जाता है। 

जल-जीवन-हरियाली अभियान केवल किसी एक व्यक्ति को आर्थिक सहायता देने वाली योजना नहीं है। यह विभिन्न विभागों, स्थानीय संस्थाओं और समुदायों के सहयोग से जल एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाया जाने वाला बहु-विभागीय मिशन है। अभियान के अंतर्गत अलग-अलग गतिविधियों की जिम्मेदारी संबंधित विभागों को दी गई है।

अभियान का उद्देश्य जल की उपलब्धता और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना, भूजल का पुनर्भरण बढ़ाना, वर्षाजल को संरक्षित करना, हरित क्षेत्र में वृद्धि करना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की दिशा में बिहार की क्षमता को मजबूत करना है।

जल-जीवन-हरियाली मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर जल निकायों, कुओं और अन्य संरचनाओं की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट तथा मिशन की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। मिशन की वार्षिक रिपोर्ट और विभागीय सूचनाओं के माध्यम से इसके कार्यों की प्रगति भी प्रकाशित की जाती है। 

जल-जीवन-हरियाली अभियान के 11 प्रमुख घटक

  1. सार्वजनिक जल निकायों एवं जलाशयों से अतिक्रमण की पहचान और उसे हटाना।

  2. तालाब, टैंक, आहर और पइन जैसे सार्वजनिक जल निकायों का पुनरुद्धार एवं कायाकल्प।

  3. सार्वजनिक कुओं की पहचान और उनका नवीकरण।

  4. सार्वजनिक कुओं एवं चापाकलों के पास सोख्ता/पुनर्भरण गड्ढों और अन्य जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण।

  5. पहाड़ी क्षेत्रों में छोटी नदियों, नालों और जल भंडारण संरचनाओं का निर्माण।

  6. नए जल संसाधनों का निर्माण तथा जल की कमी वाले क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने के उपाय।

  7. छत पर वर्षाजल संचयन संरचनाओं का निर्माण।

  8. पौधशालाओं का विकास और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण।

  9. वैकल्पिक कृषि, ड्रिप सिंचाई, जैविक खेती तथा अन्य नई कृषि तकनीकों को बढ़ावा देना।

  10. सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और ऊर्जा की बचत करना।

  11. जल-जीवन-हरियाली के प्रति जन-जागरूकता अभियान चलाना।

ये 11 components बिहार सरकार के आधिकारिक दस्तावेज में दिए गए हैं। 


 

लाभ

 

  • जल-जीवन-हरियाली अभियान के प्रमुख लाभ एवं उद्देश्य:

    1. जल स्रोतों का संरक्षण — तालाब, आहर, पइन, कुएं और अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण एवं पुनरुद्धार को बढ़ावा दिया जाता है।

    2. भूजल पुनर्भरण — सोख्ता गड्ढों, पुनर्भरण संरचनाओं और अन्य जल संरक्षण उपायों के माध्यम से भूजल स्तर को बनाए रखने में सहायता की जाती है।

    3. वर्षाजल संचयन — बारिश के पानी को संरक्षित करने और उसके उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है।

    4. वृक्षारोपण एवं हरियाली — पौधशालाओं के विकास और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहित किया जाता है।

    5. सिंचाई सुविधा में सुधार — जल संरचनाओं के पुनरुद्धार से कृषि एवं सिंचाई के लिए जल उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलती है।

    6. जलवायु परिवर्तन से निपटने में सहायता — जल, हरियाली और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के माध्यम से जलवायु संबंधी जोखिमों को कम करने का प्रयास किया जाता है।

    7. जल की बर्बादी कम करना — जल संरक्षण और जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से पानी के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है।

    8. पर्यावरण संरक्षण — वृक्षारोपण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सौर ऊर्जा जैसे उपायों को बढ़ावा दिया जाता है।

    9. ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता — जल संरचनाओं के विकास और पुनरुद्धार से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संसाधनों की उपलब्धता को मजबूत करने में मदद मिलती है।

    इन objectives का आधार बिहार सरकार के आधिकारिक 11-component विवरण और Green Budget/departmental documents हैं।

 

पात्रता

जल-जीवन-हरियाली अभियान किसी एक आयु, जाति, आय वर्ग या व्यक्तिगत लाभार्थी तक सीमित सामान्य नकद सहायता योजना नहीं है। यह बिहार में जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और हरियाली से संबंधित विभिन्न सरकारी गतिविधियों का व्यापक मिशन है।

अभियान के अलग-अलग घटकों में लाभार्थी, कार्यस्थल और भागीदारी की पात्रता संबंधित विभाग द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार अलग हो सकती है। किसी विशेष कार्य, अनुदान, कृषि गतिविधि, जल संरचना या अन्य सरकारी सहायता के लिए संबंधित विभाग की अलग पात्रता शर्तें लागू हो सकती हैं।

इसलिए इस अभियान के लिए एक समान आय सीमा, उम्र सीमा या सभी गतिविधियों पर लागू होने वाली एक ही पात्रता सूची निर्धारित नहीं की जानी चाहिए।

 

आवेदन प्रक्रिया

जल-जीवन-हरियाली अभियान के लिए पूरे बिहार में सभी नागरिकों के लिए लागू एक ही सामान्य ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया नहीं है। अभियान के अलग-अलग घटकों का क्रियान्वयन संबंधित विभागों और स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से किया जाता है।

यदि किसी विशेष गतिविधि या योजना के अंतर्गत नागरिक, किसान, संस्था या अन्य पात्र व्यक्ति को लाभ लेना है, तो उस गतिविधि के लिए संबंधित विभाग द्वारा निर्धारित आवेदन प्रक्रिया का पालन करना होता है।

किसी विशेष योजना/गतिविधि के लिए आवेदन से पहले संबंधित विभाग द्वारा जारी नवीनतम दिशा-निर्देश, पात्रता और आवेदन माध्यम की पुष्टि करना आवश्यक है।

जल-जीवन-हरियाली मिशन की आधिकारिक व्यवस्था में विभिन्न जल संरचनाओं एवं योजनाओं की निगरानी तथा रिपोर्टिंग के लिए MIS/GIS और मोबाइल एप जैसी व्यवस्थाएं भी उपलब्ध हैं। नागरिकों के लिए Citizen Report & Feedback की सुविधा के माध्यम से सुझाव या शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था भी दी गई है। 


 

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आवश्यक दस्तावेज़

जल-जीवन-हरियाली अभियान स्वयं किसी एक सामान्य आवेदन फॉर्म के माध्यम से सभी नागरिकों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता देने वाली योजना नहीं है। इसलिए पूरे अभियान के लिए एक समान अनिवार्य दस्तावेजों की सूची निर्धारित नहीं है।

किसी विशेष घटक या संबंधित योजना के अंतर्गत आवेदन करने पर उस गतिविधि से संबंधित विभाग द्वारा आवश्यक दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। दस्तावेजों की आवश्यकता संबंधित कार्य, लाभ और विभागीय प्रक्रिया के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. जल-जीवन-हरियाली अभियान क्या है?

जल-जीवन-हरियाली अभियान बिहार सरकार का जल संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से संबंधित चुनौतियों से निपटने के लिए चलाया जाने वाला व्यापक अभियान है।

2. जल-जीवन-हरियाली अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण तथा जल एवं ऊर्जा के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देना है।

3. क्या जल-जीवन-हरियाली एक नकद सहायता योजना है?

नहीं। इसे एक व्यापक अभियान/मिशन के रूप में संचालित किया जाता है। इसके अलग-अलग घटकों में जल संरक्षण, वृक्षारोपण, कृषि तकनीक, सौर ऊर्जा और जागरूकता जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

4. इस अभियान में कौन-कौन से जल स्रोत शामिल हैं?

अभियान के अंतर्गत तालाब, पोखर, आहर, पईन, कुएं तथा अन्य जल संचयन संरचनाओं के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

5. क्या इसमें Rain Water Harvesting भी शामिल है?

हाँ। अभियान के प्रमुख घटकों में भवनों में Rain Water Harvesting संरचना का निर्माण शामिल है।

6. क्या जल-जीवन-हरियाली अभियान में वृक्षारोपण किया जाता है?

हाँ। पौधशाला निर्माण और सघन वृक्षारोपण अभियान के प्रमुख घटकों में शामिल हैं।

7. क्या किसानों के लिए भी इस अभियान में गतिविधियां हैं?

हाँ। अभियान के घटकों में वैकल्पिक फसलों, Drip Irrigation, जैविक खेती और अन्य नई कृषि तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है।

8. क्या जल-जीवन-हरियाली के लिए एक ही आवेदन फॉर्म है?

नहीं। यह कई घटकों वाला अभियान है। इसलिए किसी विशेष गतिविधि या लाभ के लिए आवेदन प्रक्रिया संबंधित विभाग और घटक के अनुसार अलग हो सकती है।

9. जल-जीवन-हरियाली अभियान की आधिकारिक वेबसाइट कौन-सी है?

बिहार सरकार के Jal-Jeevan-Hariyali Mission की आधिकारिक वेबसाइट है:

10. जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत काम की स्थिति कैसे देखी जा सकती है?

आधिकारिक मिशन पोर्टल पर Dashboard उपलब्ध है, जहां जल निकाय, कुएं और चापाकल आदि से संबंधित कार्यों की स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।