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बिहार जैविक खेती योजना 2026: जैविक खेती को बढ़ावा, किसानों को मिलती है सहायता

बिहार जैविक खेती योजना 2026: जैविक खेती को बढ़ावा, किसानों को मिलती है सहायता

बिहार सरकार कृषि क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। बिहार जैविक खेती योजना 2026 के अंतर्गत जैविक खाद, जैव उर्वरक, जैव कीटनाशी, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य जैविक कृषि पद्धतियों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता है।

जैविक खेती का उद्देश्य रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करना, मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है।

बिहार कृषि विभाग की योजनाओं में जैविक खेती से संबंधित गतिविधियां शामिल हैं और विभागीय DBT पोर्टल पर “जैविक खेती योजना – दिशा-निर्देश” भी उपलब्ध है।

बिहार जैविक खेती योजना क्या है?

जैविक खेती के अंतर्गत ऐसी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाता है जिनमें मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और फसल उत्पादन के लिए जैविक खाद, जैव उर्वरक, जैव कीटनाशी, हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट आदि का उपयोग किया जाता है।

बिहार में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग समय पर राज्य योजना, जैविक कॉरिडोर और फसल-विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से सहायता दी गई है। वर्ष 2026-27 में भी जैविक कृषि इनपुट के उपयोग को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम लागू हैं।

जैविक खेती योजना 2026 का उद्देश्य

इस तरह की योजनाओं का मुख्य उद्देश्य किसानों को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों की ओर प्रोत्साहित करना है।

इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:

  • जैविक खेती को बढ़ावा देना।
  • रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करना।
  • मिट्टी की उर्वरता एवं स्वास्थ्य में सुधार करना।
  • जैविक खाद और जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ाना।
  • किसानों को जैविक कृषि तकनीकों की जानकारी देना।
  • वर्मी कम्पोस्ट और कंपोस्ट जैसी जैविक खादों को बढ़ावा देना।
  • कीट नियंत्रण के लिए जैविक उपायों का उपयोग बढ़ाना।
  • टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि को प्रोत्साहित करना।
  • जैविक उत्पादों के उत्पादन और बाजार से जुड़ाव को बढ़ावा देना।

जैविक खेती में किन चीजों का उपयोग किया जाता है?

जैविक खेती में फसल और मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार कई प्रकार के जैविक इनपुट का उपयोग किया जाता है।

1. वर्मी कम्पोस्ट

केंचुओं की सहायता से तैयार की गई जैविक खाद को वर्मी कम्पोस्ट कहा जाता है। यह मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और मिट्टी की संरचना सुधारने में उपयोगी होती है।

2. कम्पोस्ट खाद

कृषि अवशेष और अन्य जैविक पदार्थों से तैयार कम्पोस्ट का उपयोग मिट्टी में पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए किया जाता है।

3. जैव उर्वरक

PSB, राइजोबियम, एजोटोबैक्टर और अन्य जैव उर्वरकों का उपयोग फसल एवं मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार किया जा सकता है।

4. जैव कीटनाशी

फसल में कीट नियंत्रण के लिए जैविक विकल्पों का उपयोग किया जाता है। इससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

5. हरी खाद

ढैंचा जैसी फसलों को हरी खाद के रूप में उपयोग किया जाता है। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में सहायता मिलती है।

बिहार में 2026-27 में जैविक खेती से जुड़ी नई पहल

वित्तीय वर्ष 2026-27 में बिहार में फसल-विशेष जैविक इनपुट को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

विशेष रूप से गन्ने की खेती में जैविक उपादानों के उपयोग को प्रोत्साहन देने के लिए योजना लागू की गई है। इसके तहत जैव उर्वरक, जैव कीटनाशी, जैव फफूंदनाशी, हरी खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट और Integrated Pest Management से संबंधित इनपुट के उपयोग पर सहायता का प्रावधान बताया गया है। योजना की अवधि 31 मार्च 2027 तक बताई गई है।

इसका मतलब यह है कि 2026-27 में जैविक खेती से संबंधित सहायता एक ही समान राशि या सभी फसलों के लिए एक समान नियम के रूप में नहीं देखी जानी चाहिए। संबंधित फसल और योजना घटक के अनुसार लाभ एवं पात्रता अलग हो सकती है।

गन्ना किसानों के लिए जैविक इनपुट पर सहायता

2026-27 में गन्ना खेती में जैविक उपादानों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अलग प्रोत्साहन कार्यक्रम लागू किया गया है।

इसके अंतर्गत निम्न प्रकार के इनपुट शामिल हैं:

  • फेरोमोन ट्रैप
  • लाइट ट्रैप
  • स्टिकी ट्रैप
  • ट्राइकोकार्ड
  • ट्राइकोडर्मा
  • ब्यूवेरिया
  • मेटाराइजियम
  • ढैंचा हरी खाद
  • कम्पोस्ट
  • वर्मी कम्पोस्ट
  • PSB
  • राइजोबियम
  • एजोटोबैक्टर
  • एसीटोबैक्टर

उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन विभिन्न जैविक इनपुट पर अलग-अलग प्रतिशत और अधिकतम सीमा के अनुसार सहायता निर्धारित की गई है।

जैविक खेती से किसानों को क्या लाभ है?

जैविक खेती अपनाने से किसानों को कई संभावित लाभ हो सकते हैं।

मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार

जैविक खाद और जैविक पदार्थों के इस्तेमाल से मिट्टी में जैविक कार्बन और सूक्ष्मजीव गतिविधि को बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

खेती की लागत में कमी

यदि किसान खेत पर उपलब्ध कृषि अवशेषों से कम्पोस्ट या अन्य जैविक खाद तैयार करता है, तो बाहर से खरीदे जाने वाले कुछ इनपुट पर खर्च कम किया जा सकता है।

रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम

जैविक उर्वरक और जैविक कीट नियंत्रण के उपयोग से रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करने की दिशा में सहायता मिल सकती है।

पर्यावरण के लिए बेहतर

जैविक और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों का उद्देश्य मिट्टी, पानी और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र पर अनावश्यक रासायनिक दबाव को कम करना है।

टिकाऊ कृषि को बढ़ावा

लंबे समय में मिट्टी की उत्पादकता बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए जैविक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियां महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

जैविक खेती योजना 2026 के लिए कौन पात्र हो सकता है?

पात्रता संबंधित योजना और घटक के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

सामान्य रूप से संबंधित फसल की खेती करने वाले किसान, निर्धारित क्षेत्र के किसान या संबंधित कार्यक्रम में चयनित किसान योजना का लाभ ले सकते हैं।

कुछ कार्यक्रमों में किसान समूह, FPO या जैविक खेती के लिए बनाए गए क्लस्टर भी शामिल हो सकते हैं।

इसलिए किसान को आवेदन से पहले यह देखना चाहिए कि जिस जैविक खेती कार्यक्रम के लिए वह आवेदन कर रहा है, उसमें उसकी फसल, जिला और किसान श्रेणी पात्र है या नहीं।

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज

योजना या संबंधित घटक के अनुसार दस्तावेज अलग हो सकते हैं। सामान्य रूप से किसान से निम्न जानकारी मांगी जा सकती है:

  • किसान पंजीकरण संख्या
  • आधार कार्ड
  • मोबाइल नंबर
  • बैंक खाता विवरण
  • भूमि संबंधी दस्तावेज
  • राजस्व रसीद या अन्य भूमि प्रमाण
  • संबंधित फसल की जानकारी
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • निर्धारित घोषणा/प्रमाण पत्र

यदि किसान बटाई या लीज की जमीन पर खेती करता है, तो संबंधित योजना के नियमों के अनुसार एकरारनामा या अन्य दस्तावेज की आवश्यकता हो सकती है।

बिहार जैविक खेती योजना के लिए आवेदन कैसे करें?

जैविक खेती से संबंधित योजनाओं की आवेदन प्रक्रिया योजना के घटक के अनुसार अलग हो सकती है।

जहां ऑनलाइन आवेदन उपलब्ध होता है, वहां किसान बिहार कृषि विभाग के DBT पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकता है।

सामान्य प्रक्रिया:

  1. बिहार कृषि विभाग के किसान पंजीकरण की जांच करें।
  2. संबंधित योजना/जैविक खेती घटक उपलब्ध है या नहीं देखें।
  3. आवेदन फॉर्म खोलें।
  4. किसान की व्यक्तिगत जानकारी भरें।
  5. भूमि एवं फसल से संबंधित जानकारी दर्ज करें।
  6. आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
  7. बैंक खाते की जानकारी जांचें।
  8. आवेदन को अंतिम रूप से सबमिट करें।
  9. आवेदन संख्या सुरक्षित रखें।

बिहार कृषि विभाग के DBT पोर्टल पर जैविक खेती योजना से संबंधित दिशा-निर्देश उपलब्ध हैं।

अनुदान की राशि कैसे मिलती है?

यदि संबंधित जैविक खेती योजना में अनुदान का प्रावधान है, तो पात्र किसान को निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता दी जाती है।

बिहार कृषि विभाग की कई योजनाओं में सहायता राशि DBT के माध्यम से बैंक खाते में भेजी जाती है। हालांकि जैविक खेती से संबंधित प्रत्येक घटक में भुगतान की प्रक्रिया और सहायता का स्वरूप समान होना जरूरी नहीं है।

इसलिए किसान को आवेदन करने से पहले संबंधित योजना के वर्तमान दिशा-निर्देश जरूर देखना चाहिए।

जैविक खेती अपनाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

जैविक खेती शुरू करने से पहले किसान को केवल अनुदान को ध्यान में रखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए।

इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

  • मिट्टी की जांच कराएं।
  • फसल के अनुसार जैविक खाद का उपयोग करें।
  • अच्छी गुणवत्ता वाले जैविक इनपुट का इस्तेमाल करें।
  • जैविक कीट नियंत्रण की सही तकनीक अपनाएं।
  • कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।
  • फसल रिकॉर्ड और इनपुट का रिकॉर्ड रखें।
  • यदि जैविक प्रमाणन की आवश्यकता हो तो निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें।
  • बाजार में जैविक उत्पाद बेचने से पहले संबंधित प्रमाणन और लेबलिंग नियमों की जानकारी लें।

जैविक खेती और सामान्य खेती में अंतर

आधार जैविक खेती सामान्य खेती
खाद कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद रासायनिक एवं जैविक दोनों
उर्वरक जैव उर्वरक आदि रासायनिक/जैविक उर्वरक
कीट नियंत्रण जैविक एवं प्राकृतिक उपाय रासायनिक एवं अन्य उपाय
मिट्टी प्रबंधन जैविक पदार्थ और प्राकृतिक उपायों पर जोर विभिन्न कृषि इनपुट
उद्देश्य टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन उत्पादन एवं उत्पादकता पर जोर

FAQ – बिहार जैविक खेती योजना 2026

बिहार जैविक खेती योजना 2026 क्या है?

यह बिहार में जैविक खेती और जैविक कृषि इनपुट के उपयोग को बढ़ावा देने से संबंधित विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों का व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला नाम है।

क्या जैविक खेती करने वाले किसानों को अनुदान मिलता है?

कुछ निर्धारित योजनाओं और घटकों में जैविक इनपुट तथा संबंधित गतिविधियों पर सहायता/अनुदान का प्रावधान हो सकता है। लाभ योजना और घटक के अनुसार अलग-अलग होता है।

क्या सभी किसानों को ₹10,000 प्रति एकड़ मिलता है?

ऐसी एक समान राशि को सभी किसानों और सभी जैविक खेती कार्यक्रमों पर लागू नहीं माना जा सकता। अनुदान की राशि संबंधित योजना, फसल और घटक के अनुसार निर्धारित होती है।

जैविक खेती में कौन-कौन से इनपुट इस्तेमाल होते हैं?

वर्मी कम्पोस्ट, कम्पोस्ट, जैव उर्वरक, हरी खाद, जैव कीटनाशी और जैव फफूंदनाशी आदि का उपयोग किया जा सकता है।

क्या गन्ना किसानों के लिए जैविक खेती की सहायता उपलब्ध है?

2026-27 में बिहार में गन्ने की खेती में जैविक उपादानों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अलग योजना लागू की गई है। इसमें कई जैविक इनपुट पर निर्धारित सहायता का प्रावधान है।

जैविक खेती के लिए आवेदन कहां किया जा सकता है?

संबंधित योजना में ऑनलाइन आवेदन उपलब्ध होने पर बिहार कृषि विभाग के DBT पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। योजना के अनुसार आवेदन प्रक्रिया अलग हो सकती है।

निष्कर्ष

बिहार जैविक खेती योजना 2026 के माध्यम से राज्य में जैविक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जैव उर्वरक, जैव कीटनाशी और हरी खाद जैसे इनपुट के उपयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता है।

2026-27 में गन्ना किसानों के लिए जैविक उपादानों के उपयोग को प्रोत्साहित करने वाला विशेष कार्यक्रम भी लागू है। इसलिए किसानों को अपने जिले, फसल और संबंधित योजना घटक के अनुसार उपलब्ध सहायता की जानकारी लेकर ही आवेदन करना चाहिए।

स्रोत: बिहार सरकार, कृषि विभाग; बिहार सरकारगन्ना उद्योग विभाग।गन्ना उद्योग विभाग।

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