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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) 2026: किसानों को मिलती है बीज, तकनीक और कृषि सहायता

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) 2026: किसानों को मिलती है बीज, तकनीक और कृषि सहायता

भारत में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने और किसानों की उत्पादकता में सुधार करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (National Food Security Mission - NFSM) शुरू किया गया था। वर्तमान में इस मिशन का नाम राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (National Food Security & Nutrition Mission - NFSNM) है।

इस मिशन के माध्यम से किसानों को बेहतर कृषि तकनीक अपनाने, गुणवत्तापूर्ण बीजों का उपयोग करने, फसल उत्पादन बढ़ाने और पोषण वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार की सहायता दी जाती है। बिहार सहित विभिन्न राज्यों में योजना का क्रियान्वयन राज्य कृषि विभाग के माध्यम से किया जाता है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन क्या है?

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन केंद्र प्रायोजित कृषि योजना है, जिसे वर्ष 2007-08 में शुरू किया गया था। शुरुआत में इसका मुख्य उद्देश्य चावल, गेहूं और दलहन के उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ाना था।

बाद में योजना का विस्तार अन्य फसलों तक किया गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में NFSM का नाम बदलकर National Food Security & Nutrition Mission (NFSNM) किया गया, जिसमें खाद्य उत्पादन के साथ-साथ पोषण सुरक्षा पर भी अधिक जोर दिया गया है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के मुख्य उद्देश्य

इस योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • प्रमुख खाद्यान्न फसलों का उत्पादन बढ़ाना।
  • प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में सुधार करना।
  • किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ना।
  • गुणवत्तापूर्ण प्रमाणित बीजों के उपयोग को बढ़ावा देना।
  • फसल प्रदर्शन और नई कृषि तकनीकों का प्रसार करना।
  • मिट्टी की उर्वरता एवं उत्पादकता में सुधार करना।
  • एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देना।
  • एकीकृत कीट प्रबंधन तकनीकों को बढ़ावा देना।
  • किसानों को कृषि संबंधी प्रशिक्षण देना।
  • दलहन और पोषण वाली फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देना।
  • किसानों की उत्पादन क्षमता और कृषि आय में सुधार में सहायता करना।

किन फसलों को योजना में शामिल किया जाता है?

NFSNM के अंतर्गत अलग-अलग घटकों के माध्यम से प्रमुख खाद्यान्न एवं पोषण वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाता है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • चावल
  • गेहूं
  • दलहन
  • मक्का एवं अन्य मोटे अनाज
  • पोषक अनाज (Nutri-Cereals / Shree Anna)

सरकारी जानकारी के अनुसार मिशन के अंतर्गत राज्यों को फसल उत्पादन एवं संरक्षण तकनीक, फसल-प्रणाली आधारित प्रदर्शन, प्रमाणित बीजों के उत्पादन एवं वितरण, एकीकृत पोषक तत्व एवं कीट प्रबंधन तथा किसान प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों के लिए सहायता दी जाती है।

किसानों को क्या लाभ मिलता है?

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत सहायता का स्वरूप राज्य और संबंधित घटक के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसमें किसानों को निम्न प्रकार की सहायता मिल सकती है:

1. गुणवत्तापूर्ण बीज

किसानों को उन्नत एवं प्रमाणित बीजों के उत्पादन और वितरण को बढ़ावा दिया जाता है। इससे किसानों को बेहतर किस्मों को अपनाने में सहायता मिलती है।

2. फसल प्रदर्शन

किसानों के खेतों पर नई तकनीक और बेहतर कृषि पद्धतियों के प्रदर्शन आयोजित किए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य किसानों को व्यावहारिक रूप से नई तकनीक समझाना है।

3. कृषि तकनीक

उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक खेती की पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाता है।

4. पोषक तत्व प्रबंधन

फसल की आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग और Integrated Nutrient Management (INM) को बढ़ावा दिया जाता है।

5. कीट एवं रोग प्रबंधन

फसलों को कीट एवं रोगों से बचाने के लिए Integrated Pest Management (IPM) जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जाता है।

6. किसान प्रशिक्षण

किसानों को फसल उत्पादन, आधुनिक कृषि तकनीक और बेहतर खेती से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है।

बिहार के किसानों के लिए योजना कैसे उपयोगी है?

बिहार में कृषि बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों की आजीविका से जुड़ी हुई है। ऐसे में चावल, गेहूं, दलहन, मक्का और पोषक अनाज जैसी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए ऐसी योजनाओं का महत्व है।

योजना के अंतर्गत उपलब्ध सहायता का लाभ राज्य कृषि विभाग द्वारा निर्धारित गतिविधियों, लक्ष्य, फसल और जिले के अनुसार दिया जा सकता है। इसलिए प्रत्येक फसल या सहायता घटक के लिए लाभ की राशि और आवेदन की शर्तें समान नहीं होती हैं।

क्या NFSM के तहत सीधे पैसे मिलते हैं?

यह बात समझना जरूरी है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन सभी किसानों को एक समान निश्चित नकद राशि देने वाली योजना नहीं है।

इस मिशन के तहत राज्य सरकारों के माध्यम से अलग-अलग गतिविधियों के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसमें बीज, प्रदर्शन, कृषि तकनीक, पोषक तत्व प्रबंधन, कीट प्रबंधन और प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।

इसलिए किसी किसान को मिलने वाला वास्तविक लाभ संबंधित वर्ष में स्वीकृत कार्यक्रम, फसल, जिले और उपलब्ध सहायता घटक पर निर्भर करता है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के लिए पात्रता

योजना की पात्रता संबंधित गतिविधि और राज्य द्वारा लागू कार्यक्रम के अनुसार अलग हो सकती है। सामान्य रूप से लक्षित किसान संबंधित फसल की खेती करने वाले किसान होते हैं।

आवेदन या लाभ लेने से पहले किसान को यह देखना चाहिए कि उसके जिले और फसल के लिए संबंधित NFSNM घटक उपलब्ध है या नहीं।

आवेदन कैसे करें?

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के अंतर्गत लाभ लेने की प्रक्रिया संबंधित राज्य कृषि विभाग द्वारा लागू की जाती है।

बिहार में किसान योजना से संबंधित जानकारी के लिए अपने जिला कृषि कार्यालय, प्रखंड कृषि कार्यालय या संबंधित कृषि विभागीय माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

यदि किसी विशेष घटक के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू किया जाता है, तो आवेदन की तिथि, पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और अनुदान की राशि विभाग द्वारा अलग से निर्धारित की जा सकती है।

आवेदन के लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है?

किसी विशेष घटक के आवेदन के समय विभाग द्वारा मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं। सामान्य रूप से इनमें शामिल हो सकते हैं:

  • आधार कार्ड
  • किसान पंजीकरण/कृषक पहचान संबंधी विवरण
  • बैंक खाता विवरण
  • भूमि संबंधी दस्तावेज
  • मोबाइल नंबर
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • संबंधित फसल या गतिविधि से जुड़े दस्तावेज

ध्यान दें: दस्तावेजों की वास्तविक सूची संबंधित योजना घटक और आवेदन प्रक्रिया के अनुसार अलग हो सकती है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत की खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए केवल खेती का क्षेत्र बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाना, बेहतर बीजों का उपयोग, आधुनिक तकनीक अपनाना और मिट्टी एवं फसल स्वास्थ्य को बनाए रखना भी जरूरी है।

NFSNM इसी दिशा में किसानों को उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने वाली तकनीकों से जोड़ने पर जोर देता है। इसके तहत खाद्यान्न एवं पोषण वाली फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ किसानों की तकनीकी क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाता है।

NFSM और NFSNM में क्या अंतर है?

बिंदु NFSM NFSNM
पूरा नाम National Food Security Mission National Food Security & Nutrition Mission
शुरुआत 2007-08 NFSM का वर्तमान रूप
मुख्य उद्देश्य खाद्यान्न उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाना खाद्य उत्पादन के साथ पोषण सुरक्षा पर जोर
प्रमुख फसलें चावल, गेहूं, दलहन आदि चावल, गेहूं, दलहन, मोटे अनाज एवं Nutri-Cereals
सहायता बीज, प्रदर्शन, तकनीक, प्रशिक्षण आदि बीज, प्रदर्शन, तकनीक, प्रशिक्षण आदि

सरकारी जानकारी के अनुसार 2024-25 में NFSM का नाम बदलकर NFSNM किया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन क्या है?

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन एक केंद्र प्रायोजित कृषि कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य प्रमुख खाद्यान्न और पोषण वाली फसलों का उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाना है।

NFSM का नया नाम क्या है?

NFSM का वर्तमान नाम National Food Security & Nutrition Mission (NFSNM) है।

NFSM कब शुरू हुआ था?

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन वर्ष 2007-08 में शुरू किया गया था।

क्या बिहार के किसान भी इसका लाभ ले सकते हैं?

बिहार में इस मिशन के अंतर्गत लागू संबंधित गतिविधियों और कार्यक्रमों के अनुसार पात्र किसानों को लाभ दिया जा सकता है।

क्या इस योजना में सभी किसानों को निश्चित ₹ राशि मिलती है?

नहीं। यह सभी किसानों को समान निश्चित नकद राशि देने वाली योजना नहीं है। सहायता संबंधित गतिविधि और राज्य में लागू घटक के अनुसार दी जाती है।

योजना में कौन-कौन सी फसलें शामिल हैं?

मुख्य रूप से चावल, गेहूं, दलहन, मक्का/मोटे अनाज और Nutri-Cereals जैसी फसलों को मिशन के विभिन्न घटकों में बढ़ावा दिया जाता है।

किसानों को किस प्रकार की सहायता मिलती है?

किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, फसल प्रदर्शन, उत्पादन एवं संरक्षण तकनीक, पोषक तत्व प्रबंधन, कीट प्रबंधन और प्रशिक्षण जैसी सहायता मिल सकती है।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM), जिसे अब राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (NFSNM) कहा जाता है, देश में खाद्यान्न उत्पादन और कृषि उत्पादकता बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल है। बिहार के किसानों के लिए इसके अंतर्गत फसल उत्पादन तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, प्रदर्शन, पोषक तत्व एवं कीट प्रबंधन तथा प्रशिक्षण जैसी सहायता उपयोगी हो सकती है।

योजना के अंतर्गत मिलने वाला वास्तविक लाभ संबंधित वर्ष, फसल, जिले और स्वीकृत गतिविधि पर निर्भर करता है। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित कृषि विभाग से वर्तमान घटक और उपलब्ध सहायता की जानकारी लेना उचित है।

स्रोत: भारत सरकार, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग; बिहार सरकार, कृषि विभाग।

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