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उद्योग विभाग, बिहार सरकार

मुख्यमंत्री अति पिछड़ा वर्ग उद्यमी योजना

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विवरण

मुख्यमंत्री अति पिछड़ा वर्ग उद्यमी योजना बिहार सरकार के उद्योग विभाग की योजना है। यह मुख्यमंत्री उद्यमी योजना का ही एक हिस्सा है, जो अति पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए बनाया गया है।

इसका मक़सद सीधा है। बिहार के लोग नौकरी ढूँढने के बजाय अपना काम शुरू करें। इसके लिए सबसे बड़ी दिक्कत पैसे की आती है। यह योजना वही दिक्कत दूर करती है।

कितना पैसा मिलता है

इसमें ₹10 लाख तक की मदद मिलती है। इसका आधा हिस्सा यानी ₹5 लाख अनुदान है — यह पैसा लौटाना नहीं पड़ता। बाकी ₹5 लाख कर्ज़ है, जिस पर अति पिछड़ा वर्ग के लोगों से ब्याज नहीं लिया जाता।

यानी ₹10 लाख में से आधा पैसा आपका हो जाता है, और आधा बिना ब्याज के धीरे-धीरे लौटाना है।

चुनाव लॉटरी से होता है

आवेदन करने वाले सबको पैसा नहीं मिलता। आवेदन बहुत ज़्यादा आते हैं। इसलिए सरकार कंप्यूटर से लॉटरी निकालकर लोगों को चुनती है।

इसका एक अच्छा पहलू है। लॉटरी कंप्यूटर निकालता है, इसलिए इसमें किसी की सिफ़ारिश नहीं चलती। कोई कहे कि "पैसे दो, नाम निकलवा देंगे" — तो वह झूठ बोल रहा है।

पैसा एक साथ नहीं मिलता

राशि तीन किश्तों में मिलती है। हर अगली किश्त तभी मिलती है जब पिछली किश्त का हिसाब जमा कर दिया जाए। यानी काम सचमुच शुरू होना चाहिए।

ट्रेनिंग भी दी जाती है

चुने जाने के बाद पहले ट्रेनिंग होती है, फिर पहली किश्त मिलती है। ट्रेनिंग में बताया जाता है कि काम कैसे शुरू करें, हिसाब कैसे रखें और पैसा कहाँ लगाएँ।

लाभ

कुल कितना मिलता है

  • कुल ₹10 लाख तक की मदद
  • ₹5 लाख अनुदान — यह पैसा वापस नहीं करना पड़ता
  • ₹5 लाख कर्ज़ — अति पिछड़ा वर्ग के लिए इस पर ब्याज नहीं लगता

कर्ज़ कैसे लौटाना है

  • कर्ज़ 84 महीने (7 साल) की किश्तों में लौटाना होता है
  • किश्त तुरंत शुरू नहीं होती — इसके लिए शुरुआत में कुछ समय की छूट मिलती है, ताकि काम पहले जम जाए
  • किश्त ऑनलाइन पोर्टल से जमा की जाती है

पैसा कैसे मिलता है

  • पहली किश्त — ट्रेनिंग पूरी होने के बाद। इससे जगह तैयार करना, बिजली और सुरक्षा का सामान लेना जैसे काम होते हैं
  • दूसरी किश्त — पहली किश्त का हिसाब जमा करने के बाद। इससे मशीन और सामान ख़रीदा जाता है
  • तीसरी किश्त — दूसरी किश्त का हिसाब जमा करने के बाद। यह रोज़ के काम-काज के ख़र्च के लिए होती है

हर किश्त का हिसाब तय समय के भीतर देना ज़रूरी है। देर करने पर अगली किश्त रुक जाती है।

पैसे के अलावा क्या मिलता है

  • काम शुरू करने से पहले मुफ़्त ट्रेनिंग
  • ज़िला उद्योग केंद्र (DIC) से प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने में मुफ़्त मदद

पात्रता

  • आवेदक बिहार का रहने वाला होना चाहिए
  • आवेदक अति पिछड़ा वर्ग का हो और उसके पास जाति प्रमाण पत्र हो
  • उम्र 18 से 50 साल के बीच हो
  • कम से कम 12वीं पास हो, या ITI या पॉलिटेक्निक का डिप्लोमा हो
  • आवेदक के नाम से पैन कार्ड होना चाहिए
  • आवेदक के नाम से चालू बैंक खाता होना चाहिए
  • जो काम शुरू करना है, उसकी फर्म पंजीकृत होनी चाहिए — यह अकेले की फर्म, साझेदारी या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी हो सकती है
  • पहले से चल रहे कारोबार के लिए यह योजना नहीं है — यह नया काम शुरू करने के लिए है

ध्यान दें: एक परिवार से एक ही व्यक्ति को लाभ मिलता है। जिसने पहले इस योजना या बिहार लघु उद्यमी योजना का लाभ ले लिया है, वह दोबारा आवेदन नहीं कर सकता।

आवेदन प्रक्रिया

चरण 1 — पंजीकरण

  1. उद्योग विभाग के पोर्टल udyami.bihar.gov.in पर जाएँ
  2. "मुख्यमंत्री उद्यमी योजना" चुनें, फिर अपना वर्ग "अति पिछड़ा वर्ग" चुनें
  3. आधार नंबर और मोबाइल नंबर भरें
  4. मोबाइल पर आए OTP से पंजीकरण पूरा करें

चरण 2 — आवेदन भरना

  1. अपनी जानकारी, पढ़ाई और पते का ब्यौरा भरें
  2. जो काम शुरू करना है, वह चुनें और उसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट लगाएँ
  3. सभी कागज़ स्कैन करके अपलोड करें
  4. भरी हुई जानकारी एक बार दोबारा पढ़ लें, फिर जमा करें
  5. आवेदन का प्रिंट निकालकर अपने पास रखें

चरण 3 — लॉटरी

  1. आवेदन की तारीख़ ख़त्म होने के बाद विभाग सारे आवेदन जाँचता है
  2. फिर कंप्यूटर से लॉटरी निकाली जाती है, ज़िलेवार
  3. चुने गए लोगों की सूची पोर्टल पर आती है

चरण 4 — कागज़ों की जाँच और ट्रेनिंग

  1. चुने जाने के बाद सारे मूल कागज़ जमा करने होते हैं
  2. जाँच पूरी होने पर ट्रेनिंग होती है, जिसमें जाना ज़रूरी है
  3. ट्रेनिंग के बाद पहली किश्त खाते में आती है

चरण 5 — बाकी किश्तें

पहली किश्त ख़र्च करके उसका हिसाब पोर्टल पर जमा करें। जाँच के बाद दूसरी किश्त मिलती है। इसी तरह तीसरी किश्त मिलती है। हर बार हिसाब तय समय के भीतर देना ज़रूरी है।

आवेदन मुफ़्त है। कोई भी एजेंट, साइबर कैफ़े वाला या बिचौलिया अगर "लॉटरी में नाम निकलवा देंगे" या "फ़ाइल पास करा देंगे" कहकर पैसे माँगे, तो न दें। लॉटरी कंप्यूटर निकालता है, उसमें किसी का हाथ नहीं होता।

आवेदन कब होते हैं: पोर्टल हर साल कुछ हफ़्तों के लिए खुलता है। तारीख़ की घोषणा उद्योग विभाग करता है। इसलिए पोर्टल के नोटिस वाले हिस्से पर नज़र रखें।

 

टोल फ्री: 1800 345 6214

आधिकारिक पोर्टल खोलें

आवश्यक दस्तावेज़

  • आधार कार्ड (मोबाइल नंबर से जुड़ा हुआ)
  • जाति प्रमाण पत्र (अति पिछड़ा वर्ग का)
  • निवास (आवासीय) प्रमाण पत्र
  • पैन कार्ड
  • 12वीं, ITI या डिप्लोमा का प्रमाण पत्र
  • बैंक पासबुक या रद्द किया हुआ चेक
  • पासपोर्ट साइज़ फोटो
  • हस्ताक्षर की स्कैन कॉपी
  • फर्म के पंजीकरण का कागज़

सबसे ज़रूरी बात: आधार, पैन और बैंक पासबुक — तीनों में नाम की स्पेलिंग एक जैसी होनी चाहिए। थोड़ा भी फ़र्क़ हुआ तो आवेदन अटक जाता है।

दूसरी ज़रूरी बात: प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी माँगी जाती है — यानी आप कौन-सा काम करेंगे और पैसा कहाँ लगाएँगे, इसका ब्यौरा। यह रिपोर्ट अपने ज़िला उद्योग केंद्र (DIC) से मुफ़्त बनवाई जा सकती है। इसके लिए किसी को पैसे देने की ज़रूरत नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. इस योजना में कितना पैसा मिलता है?

कुल ₹10 लाख तक मिलते हैं। इसमें ₹5 लाख अनुदान होता है, जो लौटाना नहीं पड़ता। बाकी ₹5 लाख कर्ज़ होता है।

Q2. क्या पूरा पैसा लौटाना पड़ता है?

नहीं। आधा पैसा यानी ₹5 लाख अनुदान है, वह आपका हो जाता है। सिर्फ़ ₹5 लाख कर्ज़ वाला हिस्सा लौटाना होता है।

Q3. कर्ज़ पर ब्याज कितना लगता है?

अति पिछड़ा वर्ग के आवेदकों से ब्याज नहीं लिया जाता। यानी जितना कर्ज़ लिया, उतना ही लौटाना है।

Q4. कर्ज़ कितने समय में लौटाना है?

84 महीने यानी 7 साल की किश्तों में। किश्त तुरंत शुरू नहीं होती — शुरुआत में कुछ समय की छूट मिलती है ताकि काम पहले जम जाए।

Q5. कौन आवेदन कर सकता है?

बिहार का रहने वाला अति पिछड़ा वर्ग का व्यक्ति, जिसकी उम्र 18 से 50 साल के बीच हो और जो कम से कम 12वीं पास हो या जिसके पास ITI या पॉलिटेक्निक का डिप्लोमा हो।

Q6. क्या 10वीं पास लोग आवेदन कर सकते हैं?

नहीं। कम से कम 12वीं पास होना ज़रूरी है। ITI या पॉलिटेक्निक का डिप्लोमा भी चलता है।

Q7. क्या आवेदन करने पर पैसा मिलना पक्का है?

नहीं। चुनाव कंप्यूटर से निकलने वाली लॉटरी से होता है। आवेदन बहुत ज़्यादा आते हैं और हर साल का बजट तय होता है, इसलिए सबको पैसा नहीं मिल पाता।

Q8. क्या कोई सिफ़ारिश से नाम निकलवा सकता है?

नहीं। लॉटरी कंप्यूटर निकालता है। अगर कोई कहे कि "पैसे दो, नाम निकलवा देंगे" तो वह ठगी कर रहा है। ऐसे व्यक्ति की शिकायत ज़िला उद्योग केंद्र में करें।

Q9. क्या पूरा ₹10 लाख एक साथ मिल जाता है?

नहीं। पैसा तीन किश्तों में मिलता है। हर अगली किश्त तभी मिलती है जब पिछली किश्त का हिसाब जमा कर दिया जाए।

Q10. प्रोजेक्ट रिपोर्ट कौन बनाएगा?

अपने ज़िला उद्योग केंद्र (DIC) से यह मुफ़्त बनवाई जा सकती है। इसके लिए किसी एजेंट को पैसे देने की ज़रूरत नहीं है।

Q11. क्या पहले से चल रहे काम के लिए भी पैसा मिलेगा?

नहीं। यह योजना नया काम शुरू करने के लिए है। पहले से चल रहे कारोबार को बढ़ाने के लिए यह नहीं मिलती।

Q12. क्या फर्म पंजीकृत करानी ज़रूरी है?

हाँ। जो काम शुरू करना है, उसकी फर्म पंजीकृत होनी चाहिए। यह अकेले की फर्म, साझेदारी या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी हो सकती है।

Q13. क्या ट्रेनिंग में जाना ज़रूरी है?

हाँ। चुने जाने के बाद ट्रेनिंग होती है और उसमें जाना ज़रूरी है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ही पहली किश्त मिलती है।

Q14. लॉटरी में नाम नहीं निकला तो क्या करें?

अगले साल फिर आवेदन कर सकते हैं। एक बार आवेदन कर देने से आपकी पात्रता ख़त्म नहीं होती।

Q15. यह बिहार लघु उद्यमी योजना से अलग कैसे है?

दोनों अलग योजनाएँ हैं। लघु उद्यमी योजना में ₹2 लाख मिलते हैं और वह पूरा अनुदान होता है, उसमें आय ₹6,000 मासिक से कम होनी चाहिए। इस योजना में ₹10 लाख मिलते हैं, जिसमें आधा अनुदान और आधा कर्ज़ होता है, और 12वीं पास होना ज़रूरी है। एक व्यक्ति दोनों में से किसी एक का ही लाभ ले सकता है।