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स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार

मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष — कैंसर, हृदय रोग व अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता

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Overview

मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग की एक योजना है, जिसका मक़सद है कि राज्य के गरीब और ज़रूरतमंद मरीज सिर्फ पैसों की कमी की वजह से गंभीर बीमारियों का इलाज कराने से वंचित न रहें। इस कोष से कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, स्पाइनल सर्जरी, हिप और नी (घुटना) रिप्लेसमेंट जैसी बड़ी और महंगी बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक अनुदान दिया जाता है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ वर्ष 2024-25 और 2025-26 में ही इस कोष से 49,270 मरीजों को कुल ₹385.09 करोड़ की सहायता दी जा चुकी है — इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह योजना कितने बड़े स्तर पर काम कर रही है।

इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग बच्चों और बालिकाओं के लिए कुछ खास योजनाएं भी चलाता है — जैसे बाल हृदय योजना (जन्मजात हृदय-छेद वाले बच्चों का मुफ़्त इलाज), मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना (12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का सीएमसी वेल्लोर में मुफ़्त बोन मैरो ट्रांसप्लांट) और मुख्यमंत्री बालिका कैंसर प्रतिरक्षण योजना (9-14 वर्ष की बालिकाओं को मुफ़्त HPV टीका, जिससे आगे चलकर सर्वाइकल कैंसर से बचाव होता है)।

आवेदन करने के लिए मरीज या उसके परिजन को अपने ज़िले के सिविल सर्जन कार्यालय में संपर्क करना होता है, जो आवेदन को आगे स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय, पटना को भेजता है।

 

Benefits

  • कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, स्पाइनल सर्जरी, हिप/नी रिप्लेसमेंट जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक अनुदान
  • राज्य के अंदर और राज्य के बाहर, दोनों जगह इलाज कराने पर सहायता का प्रावधान
  • जन्मजात हृदय रोग वाले बच्चों का बाल हृदय योजना के तहत पूरी तरह मुफ़्त इलाज
  • थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों का सीएमसी वेल्लोर में मुफ़्त बोन मैरो ट्रांसप्लांट
  • 9-14 वर्ष की बालिकाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए मुफ़्त HPV टीकाकरण
  • राशि सीधे अस्पताल को या मरीज के परिवार को दी जाती है ताकि इलाज में देरी न हो

 

Eligibility

  • आवेदक/मरीज बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए
  • मरीज आर्थिक रूप से कमज़ोर/गरीब वर्ग से हो — पारंपरिक रूप से वार्षिक पारिवारिक आय ₹1 लाख से कम होने की शर्त रही है (कुछ श्रेणियों में यह सीमा समय के साथ बदली भी है)
  • मरीज को कोष द्वारा निर्धारित असाध्य/गंभीर बीमारियों में से किसी एक से पीड़ित होना चाहिए (कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग आदि)
  • सरकारी अस्पताल या CGHS-मान्यता प्राप्त अस्पताल से इलाज का पर्जा/प्राक्कलन (estimate) होना ज़रूरी है
  • सटीक आय-सीमा और बीमारियों की पूरी सूची में समय-समय पर बदलाव होता है — आवेदन से पहले सिविल सर्जन कार्यालय से पुष्टि करें

 

How to apply

 

  1. सबसे पहले किसी सरकारी अस्पताल या CGHS-मान्यता प्राप्त अस्पताल से बीमारी की जांच करवाकर इलाज का चिकित्सा पर्जा और मूल प्राक्कलन (estimate) लें।
  2. अपने ज़िले के सिविल सर्जन कार्यालय में जाकर आवेदन का निर्धारित प्रारूप (फॉर्म) प्राप्त करें।
  3. फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरें और आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, चिकित्सा प्राक्कलन जैसे सभी दस्तावेज़ संलग्न करें।
  4. भरा हुआ फॉर्म सभी दस्तावेज़ों के साथ सिविल सर्जन कार्यालय में जमा करें और रसीद ज़रूर लें।
  5. आवेदन वहां से स्वीकृति के लिए निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं, बिहार, पटना को भेजा जाता है।
  6. स्वीकृति मिलने के बाद सहायता राशि जारी की जाती है।

 

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Documents needed

  • आधार कार्ड
  • आय प्रमाण पत्र (ज़िला पदाधिकारी/अनुमंडल पदाधिकारी/अंचलाधिकारी से जारी)
  • निवास प्रमाण पत्र
  • सरकारी अस्पताल या CGHS-मान्यता प्राप्त अस्पताल का चिकित्सा पर्जा और मूल प्राक्कलन (इलाज का अनुमानित खर्च)
  • बैंक पासबुक
  • पासपोर्ट साइज़ फोटो

 

Frequently asked questions

Q1. मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष क्या है?

जवाब: यह बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग की योजना है, जिसके तहत कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, स्पाइनल सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित गरीब मरीजों को इलाज के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है।

Q2. क्या "मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना" और यह योजना एक ही हैं?

जवाब: "मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना" नाम से जानी जाने वाली योजना झारखंड सरकार की है। बिहार में इसी तरह की योजना का नाम "मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष" है, जिसे बिहार का स्वास्थ्य विभाग चलाता है।

Q3. कौन-कौन सी बीमारियां इसमें कवर होती हैं?

जवाब: कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, स्पाइनल सर्जरी, हिप और नी रिप्लेसमेंट जैसी गंभीर व महंगी बीमारियां इसमें शामिल हैं। पूरी और मौजूदा सूची सिविल सर्जन कार्यालय से जांच लें।

Q4. इस योजना के लिए पात्रता क्या है?

जवाब: आवेदक बिहार का निवासी होना चाहिए और आर्थिक रूप से कमज़ोर होना चाहिए। पारंपरिक रूप से वार्षिक पारिवारिक आय ₹1 लाख से कम होने की शर्त रही है, लेकिन यह समय के साथ बदल सकती है।

Q5. आवेदन कहां और कैसे करें?

जवाब: आवेदन अपने ज़िले के सिविल सर्जन कार्यालय में ऑफलाइन किया जाता है। वहां से फॉर्म लेकर, ज़रूरी दस्तावेज़ों के साथ जमा करना होता है, जिसे आगे स्वीकृति के लिए स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय, पटना भेजा जाता है।

Q6. आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज़ चाहिए?

जवाब: आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, सरकारी/CGHS-मान्यता प्राप्त अस्पताल का चिकित्सा प्राक्कलन (इलाज का अनुमानित खर्च), बैंक पासबुक और फोटो चाहिए।

Q7. क्या निजी अस्पताल में इलाज कराने पर भी सहायता मिलेगी?

जवाब: सामान्यतः यह सहायता सरकारी अस्पताल या CGHS से मान्यता प्राप्त अस्पताल के इलाज के लिए दी जाती है। किसी सामान्य निजी अस्पताल के इलाज के लिए यह लागू होती है या नहीं, इसकी पुष्टि सिविल सर्जन कार्यालय से करें।

Q8. बाल हृदय योजना क्या है?

जवाब: यह इसी कोष से जुड़ी एक खास पहल है, जिसके तहत जन्म से दिल में छेद (हृदय दोष) के साथ पैदा हुए बच्चों का पूरी तरह मुफ़्त इलाज किया जाता है।

Q9. मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना किसके लिए है?

जवाब: यह 12 वर्ष से कम उम्र के थैलेसीमिया-पीड़ित बच्चों के लिए है, जिनका बोन मैरो ट्रांसप्लांट सीएमसी वेल्लोर में मुफ़्त किया जाता है। अब तक इसमें 30 बच्चे रोगमुक्त हो चुके हैं।