उद्योग विभाग, बिहार सरकार (विकास भवन, पटना)
बिहार स्टार्टअप योजना 2026
Overview
बिहार स्टार्टअप पॉलिसी बिहार सरकार के उद्योग विभाग की नीति है, जो जुलाई 2022 में लागू हुई और 2027 तक चलेगी। इसका मक़सद है — राज्य के युवाओं के नए विचारों को पैसे और मार्गदर्शन की कमी में दम तोड़ने से बचाना।
इसके तहत चुने गए स्टार्टअप को ₹10 लाख तक का सीड फंड मिलता है, जो ब्याज मुक्त ऋण के रूप में दिया जाता है और 10 साल में लौटाना होता है।
सबसे बड़ी बात — कंपनी में हिस्सेदारी नहीं देनी पड़ती
आम निवेशक पैसा लगाने के बदले कंपनी में हिस्सेदारी (equity) माँगते हैं। यहाँ ऐसा नहीं है। सरकार का पैसा कर्ज़ के रूप में आता है, ब्याज भी नहीं लगता, और आपकी कंपनी पूरी तरह आपकी रहती है। शुरुआती दौर के संस्थापक के लिए यह बहुत बड़ी बात है।
यह हर बिज़नेस के लिए नहीं है
यह साफ़ समझ लेना ज़रूरी है — यह दुकान खोलने या ख़रीद-बिक्री का काम शुरू करने की योजना नहीं है। इसमें नए और अलग (innovative) विचारों को ही चुना जाता है, जिनमें कुछ नया हल, नई तकनीक या काम करने का नया तरीक़ा हो। परंपरागत व्यापार के लिए बिहार सरकार की दूसरी योजनाएँ हैं।
पैसे के अलावा भी बहुत कुछ
चुने गए स्टार्टअप को इनक्यूबेशन सेंटर और को-वर्किंग स्पेस की सुविधा, अनुभवी लोगों से मार्गदर्शन (मेंटरशिप), चार्टर्ड अकाउंटेंट से वित्तीय सलाह, और पेटेंट व ट्रेडमार्क जैसे क़ानूनी कामों में मदद मिलती है। साथ में बिहार सरकार की आधिकारिक मान्यता भी, जो आगे निवेशकों के सामने काम आती है।
अब तक क्या हुआ है
बिहार में अब तक 1,500 से ज़्यादा स्टार्टअप इस नीति के तहत पंजीकृत हो चुके हैं और कई करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
Benefits
सीड फंड — मुख्य लाभ
- ₹10 लाख तक का सीड फंड, ब्याज मुक्त ऋण के रूप में
- लौटाने की अवधि 10 वर्ष
- कोई ब्याज नहीं, कोई इक्विटी नहीं — कंपनी पूरी तरह आपकी रहती है
- पैसा प्रोटोटाइप बनाने, बाज़ार जाँचने और शुरुआती ज़रूरतों पर ख़र्च किया जा सकता है
कुछ वर्गों के लिए अतिरिक्त सहायता
- महिला संस्थापक — 5% अतिरिक्त
- अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति संस्थापक — 5% अतिरिक्त
- दिव्यांग संस्थापक — 15% अतिरिक्त
- कुल कोष का 22% हिस्सा अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षित
पेटेंट और बौद्धिक संपदा में मदद
- देश में पेटेंट कराने का पूरा ख़र्च सरकार उठाती है
- विदेश में पेटेंट कराने पर भी तय सीमा तक मदद मिलती है
- ट्रेडमार्क और कॉपीराइट के कामों में क़ानूनी सहायता
निवेश से जुड़ी सहायता
- मैचिंग ग्रांट — अगर आपको मान्यता प्राप्त एंजेल निवेशक या श्रेणी-I वैकल्पिक निवेश कोष से पैसा मिलता है, तो सरकार उतनी ही राशि (1:1) मिलाकर देती है
- सक्सेस फीस — राज्य में पंजीकृत एंजेल निवेशक से निवेश मिलने पर उस राशि का 2% प्रोत्साहन के रूप में
नियमों में राहत और दूसरे फ़ायदे
- पाँच साल तक लाइसेंस और सरकारी निरीक्षण से छूट (सुरक्षा से जुड़ी अनिवार्य अनुमतियाँ इससे बाहर हैं)
- सरकारी ख़रीद में स्टार्टअप के उत्पादों और सेवाओं को प्राथमिकता
- नए औद्योगिक पार्कों और इनक्यूबेशन केंद्रों में 10% जगह आरक्षित, रियायती दर पर
- इनक्यूबेशन, को-वर्किंग स्पेस और मेंटरशिप की सुविधा
Eligibility
- आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक हो
- स्टार्टअप का मुख्य कामकाज बिहार में होना चाहिए
- विचार नया और अलग (innovative) हो — केवल ख़रीद-बिक्री या परंपरागत व्यापार पात्र नहीं है
- स्टार्टअप एक पंजीकृत इकाई हो — प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, LLP या पंजीकृत साझेदारी फर्म
- कंपनी अपेक्षाकृत नई हो और उसका कारोबार नीति में तय सीमा के भीतर हो
- एक ही संस्थापक या इकाई बार-बार इस लाभ की पात्र नहीं होती
सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी: बहुत से लोग किराना दुकान, कपड़े की दुकान या डेयरी जैसे काम के लिए आवेदन कर देते हैं और अस्वीकार हो जाते हैं। ऐसे परंपरागत कामों के लिए मुख्यमंत्री उद्यमी योजना और बिहार लघु उद्यमी योजना ज़्यादा उपयुक्त हैं। स्टार्टअप पॉलिसी सिर्फ़ नए विचारों के लिए है।
How to apply
चरण 1 — पंजीकरण
- उद्योग विभाग के आधिकारिक स्टार्टअप पोर्टल startup.bihar.gov.in पर जाएँ
- संस्थापक की बुनियादी जानकारी और स्टार्टअप का नाम भरकर पंजीकरण करें
- ईमेल और मोबाइल सत्यापित करें
चरण 2 — आवेदन भरना
- लॉगिन करके आवेदन के तीनों हिस्से भरें — इकाई की जानकारी, स्टार्टअप की जानकारी, और बिज़नेस आइडिया
- बिज़नेस प्लान और ज़रूरी दस्तावेज़ अपलोड करें
- जमा करने से पहले चेकलिस्ट से सब कुछ एक बार मिला लें
- आवेदन जमा करें और पावती (acknowledgement) संभालकर रखें
चरण 3 — जाँच और प्रस्तुति
- पहले आवेदन की प्रारंभिक जाँच होती है
- चुने गए आवेदकों को विशेषज्ञ समिति के सामने अपना विचार प्रस्तुत करने बुलाया जाता है
- प्रस्तुति में आपसे बिज़नेस मॉडल, बाज़ार और पैसे के उपयोग पर सवाल पूछे जाते हैं
- समिति की सिफ़ारिश पर अंतिम स्वीकृति मिलती है
चरण 4 — राशि मिलना
स्वीकृति के बाद सीड फंड एक साथ नहीं, किश्तों में दिया जाता है। अगली किश्त तब मिलती है जब पहली किश्त से तय काम पूरा हो और उसका ब्यौरा जमा हो जाए।
धैर्य रखें: पंजीकरण से लेकर पैसा मिलने तक की पूरी प्रक्रिया में कुछ महीने लग सकते हैं, क्योंकि इसमें जाँच और प्रस्तुति दोनों शामिल हैं। यह मुख्यमंत्री उद्यमी योजना की तरह लॉटरी से नहीं, विचार की गुणवत्ता से चुना जाता है।
आवेदन मुफ़्त है। कोई सलाहकार "फ़ाइल पास करा देने" या "समिति में सिफ़ारिश" के नाम पर पैसे माँगे तो न दें।
उद्योग विभाग, विकास भवन, पटना
ईमेल: startup-bihar@gov.in
टोल फ्री: 1800 345 6214
Documents needed
संस्थापक के दस्तावेज़
- आधार कार्ड
- पैन कार्ड
- आवासीय (निवास) प्रमाण पत्र
- शैक्षणिक प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
- जाति या दिव्यांगता प्रमाण पत्र (अतिरिक्त सहायता लेनी हो तो)
स्टार्टअप के दस्तावेज़
- कंपनी या फर्म का पंजीकरण प्रमाण पत्र (Certificate of Incorporation)
- कंपनी का पैन और GST नंबर (यदि लिया हो)
- विस्तृत बिज़नेस प्लान — समस्या क्या है, आपका हल क्या है, बाज़ार कितना बड़ा है, पैसा कहाँ ख़र्च होगा
- प्रस्तुति (pitch deck), क्योंकि विशेषज्ञ समिति के सामने अपना विचार रखना होता है
- कंपनी के नाम का बैंक खाता विवरण
- प्रोटोटाइप, डेमो या अब तक की प्रगति का प्रमाण (हो तो)
सबसे ज़रूरी सलाह: यहाँ सफलता कागज़ों से नहीं, बिज़नेस प्लान की मज़बूती से तय होती है। जल्दबाज़ी में बना प्लान सबसे पहले छँटता है। समय लेकर लिखें कि आप कौन-सी असली समस्या हल कर रहे हैं और आपका तरीक़ा दूसरों से अलग कैसे है।