मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना 2026: ₹1 लाख तक सहायता, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया
बिहार सरकार द्वारा दिव्यांगजनों को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनके विवाह को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत पात्र दिव्यांग व्यक्ति के विवाह पर सरकार की ओर से आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी इस योजना के संचालन के लिए बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा ₹4 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। इससे स्पष्ट है कि योजना 2026-27 में भी सरकारी बजट के अंतर्गत संचालित है।
मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना क्या है?
मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना बिहार सरकार की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजना है। इसका उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के विवाह को प्रोत्साहित करना और विवाह के समय उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
इस योजना का संचालन समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार के अंतर्गत किया जाता है और योजना से संबंधित लाभार्थी प्रक्रिया के लिए विभाग का ई-सुविधा (E-Suvidha) पोर्टल इस्तेमाल किया जाता है। बिहार सरकार के E-Suvidha पोर्टल पर यह योजना वर्तमान में सूचीबद्ध है।
योजना के तहत कितनी सहायता मिलती है?
उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार पात्र दिव्यांग व्यक्ति के विवाह के लिए ₹1,00,000 यानी एक लाख रुपये का प्रोत्साहन अनुदान दिया जाता है। बिहार विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दिव्यांगजनों के विवाह के लिए पात्र लाभार्थियों को ₹1 लाख अनुदान दिए जाने का उल्लेख है।
यदि पति और पत्नी दोनों दिव्यांग हैं और योजना की पात्रता पूरी करते हैं, तो सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार दोनों को अलग-अलग लाभ दिया जा सकता है। ऐसे मामले में कुल सहायता ₹2 लाख तक हो सकती है।
नोट: किसी विशेष विवाह में मिलने वाली अंतिम राशि संबंधित पात्रता, विभागीय नियम और स्वीकृति पर निर्भर करेगी।
मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को विवाह के लिए आर्थिक सहयोग देना और उन्हें सामाजिक रूप से सम्मानजनक एवं सुरक्षित वैवाहिक जीवन की शुरुआत में सहायता करना है।
योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं:
- दिव्यांग व्यक्तियों के विवाह को प्रोत्साहित करना।
- विवाह के समय आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना।
- दिव्यांगजनों के सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना।
- दिव्यांग व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना।
- दिव्यांग दंपतियों को आर्थिक सहयोग प्रदान करना।
मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना की पात्रता
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को विभाग द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होता है।
उपलब्ध योजना विवरण के अनुसार प्रमुख शर्तों में शामिल हैं:
- आवेदक बिहार का निवासी होना चाहिए।
- विवाह कानून के अनुसार निर्धारित आयु पूरी होनी चाहिए।
- संबंधित व्यक्ति की दिव्यांगता निर्धारित मानदंड के अनुसार होनी चाहिए।
- दिव्यांगता का प्रमाण सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र से होना चाहिए।
- विवाह का प्रमाण उपलब्ध होना चाहिए।
- आवेदक को योजना के लिए निर्धारित आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
- आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण-पत्र आवेदन के साथ प्रस्तुत करने होंगे।
महत्वपूर्ण: दिव्यांगता की प्रतिशत सीमा और अन्य पात्रता शर्तें आवेदन के समय लागू विभागीय दिशा-निर्देश के अनुसार सत्यापित करनी चाहिए।
पति-पत्नी दोनों दिव्यांग होने पर क्या लाभ मिलेगा?
यदि पति और पत्नी दोनों दिव्यांग हैं और दोनों योजना की पात्रता शर्तें पूरी करते हैं, तो सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार दोनों को अलग-अलग ₹1 लाख का लाभ दिया जा सकता है।
इस प्रकार पात्रता पूरी होने पर कुल प्रोत्साहन राशि ₹2 लाख तक हो सकती है।
योजना में पैसा कैसे मिलता है?
योजना से संबंधित प्रक्रिया बिहार सरकार के E-Suvidha पोर्टल के माध्यम से संचालित होती है। पोर्टल पर लाभार्थी की जानकारी, सत्यापन, स्वीकृति और भुगतान से संबंधित प्रक्रिया का प्रावधान है।
E-Suvidha पोर्टल पर यह भी निर्देश दिया गया है कि जिन लाभार्थियों का Fixed Deposit किया जा चुका है, उनका Fixed Deposit विवरण पोर्टल पर अपडेट किया जाए। इससे पता चलता है कि स्वीकृत लाभार्थियों के मामलों में FD से संबंधित प्रक्रिया भी योजना के प्रशासनिक workflow का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना के लिए जरूरी दस्तावेज
आवेदन करते समय विभाग द्वारा मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध रखना जरूरी है। सामान्य रूप से निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है:
- आधार कार्ड
- दिव्यांगता प्रमाण-पत्र
- विवाह प्रमाण-पत्र/विवाह से संबंधित प्रमाण
- आयु प्रमाण-पत्र
- बिहार का निवास प्रमाण-पत्र
- पति-पत्नी का संयुक्त फोटो
- बैंक खाते की जानकारी
- मोबाइल नंबर
- आवेदन पत्र
- अन्य आवश्यक विभागीय दस्तावेज
दस्तावेजों की अंतिम सूची आवेदन के समय लागू विभागीय निर्देशों के अनुसार जांचना चाहिए।
मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना में आवेदन कैसे करें?
योजना से संबंधित आवेदन एवं लाभार्थी प्रक्रिया E-Suvidha प्रणाली के माध्यम से संचालित की जाती है। बिहार सरकार के E-Suvidha पोर्टल पर मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना के लिए अलग व्यवस्था उपलब्ध है।
Step 1: जरूरी दस्तावेज तैयार करें
सबसे पहले आधार कार्ड, दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, विवाह प्रमाण, बैंक खाते की जानकारी और अन्य जरूरी दस्तावेज तैयार रखें।
Step 2: निर्धारित आवेदन प्रक्रिया पूरी करें
योजना के लिए निर्धारित आवेदन-पत्र और संबंधित प्रक्रिया को पूरा करें।
Step 3: आवेदन और दस्तावेज जमा करें
ऑनलाइन/विभागीय प्रक्रिया के अनुसार आवेदन और आवश्यक दस्तावेज जमा किए जाते हैं। जिन आवेदकों को ऑफलाइन प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन करना हो, वे संबंधित जिला सामाजिक सुरक्षा कार्यालय से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
Step 4: दस्तावेजों का सत्यापन
आवेदन जमा होने के बाद संबंधित अधिकारी द्वारा आवेदक और दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है।
Step 5: आवेदन की स्वीकृति
सत्यापन के बाद पात्र आवेदन को स्वीकृत किया जाता है। असंगत या अपूर्ण जानकारी होने पर आवेदन में सुधार/अस्वीकृति की प्रक्रिया लागू हो सकती है।
Step 6: भुगतान की प्रक्रिया
स्वीकृति के बाद लाभार्थी को योजना के नियमों के अनुसार प्रोत्साहन अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। E-Suvidha पोर्टल पर भुगतान एवं FD से संबंधित रिकॉर्ड भी अपडेट किए जाते हैं।
मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना 2026 की मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना |
| राज्य | बिहार |
| विभाग | समाज कल्याण विभाग |
| मुख्य लाभार्थी | पात्र दिव्यांग व्यक्ति |
| प्रोत्साहन राशि | ₹1,00,000 तक प्रति पात्र लाभार्थी |
| दोनों पति-पत्नी दिव्यांग होने पर | पात्रता के अनुसार दोनों को अलग-अलग लाभ |
| वित्तीय वर्ष 2026-27 बजट | ₹4 करोड़ |
| आवेदन/प्रक्रिया | E-Suvidha |
| उद्देश्य | दिव्यांगजनों के विवाह को प्रोत्साहन और आर्थिक सहायता |
2026-27 में योजना के लिए ₹4 करोड़ के बजट प्रावधान का उल्लेख बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के रिकॉर्ड में है।
योजना की महत्वपूर्ण बातें
मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना को केवल विवाह के समय आर्थिक सहायता के रूप में नहीं देखना चाहिए। इसका उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा और सम्मान के साथ वैवाहिक जीवन शुरू करने में सहायता देना भी है।
बिहार सरकार के रिकॉर्ड में 2023-24 में इस योजना के अंतर्गत 896 लाभार्थियों और 2024-25 में 545 लाभार्थियों को भुगतान किए जाने का उल्लेख किया गया है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भी योजना के लिए ₹4 करोड़ का बजट स्वीकृत है।
मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना FAQs
1. मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना क्या है?
यह बिहार सरकार की योजना है जिसके तहत पात्र दिव्यांग व्यक्तियों के विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक अनुदान दिया जाता है।
2. योजना के तहत कितने रुपये मिलते हैं?
पात्र लाभार्थी को ₹1 लाख तक का प्रोत्साहन अनुदान दिया जाता है।
3. यदि पति और पत्नी दोनों दिव्यांग हैं तो क्या दोनों को लाभ मिलेगा?
हाँ, सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यदि पति-पत्नी दोनों पात्र दिव्यांग हैं तो दोनों को अलग-अलग लाभ मिल सकता है।
4. योजना किस विभाग द्वारा चलाई जाती है?
यह योजना बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित होती है।
5. आवेदन किस पोर्टल से संबंधित है?
योजना से संबंधित लाभार्थी प्रक्रिया के लिए बिहार सरकार का E-Suvidha पोर्टल इस्तेमाल किया जाता है।
6. क्या 2026-27 में योजना चल रही है?
हाँ। बिहार सरकार के 2026-27 के बजट/आवंटन रिकॉर्ड में मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना के लिए ₹4 करोड़ का प्रावधान दर्ज है।
7. दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जरूरी है?
हाँ। योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित दिव्यांगता का प्रमाण निर्धारित दस्तावेजों के माध्यम से प्रस्तुत करना आवश्यक है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना 2026 बिहार सरकार की दिव्यांगजनों के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है। इसके तहत पात्र दिव्यांग व्यक्ति के विवाह पर ₹1 लाख तक का प्रोत्साहन अनुदान दिया जाता है। यदि पति-पत्नी दोनों योजना की पात्रता पूरी करते हैं, तो सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार दोनों को अलग-अलग लाभ मिल सकता है। योजना से संबंधित प्रक्रिया बिहार सरकार के E-Suvidha पोर्टल से जुड़ी है और वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए ₹4 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।
स्रोत: बिहार सरकार, समाज कल्याण विभाग एवं E-Suvidha पोर्टल